मुंबई
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है, जिसका असर पूरे राज्य में परिवहन व्यवस्था पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रक, बस, टैक्सी, ऑटो रिक्शा और टेम्पो ऑपरेटरों ने ई-चालान सिस्टम के कथित दुरुपयोग और मनमाने जुर्मानों के विरोध में राज्यव्यापी चक्का जाम का ऐलान किया है।

यह हड़ताल महाराष्ट्र ट्रांसपोर्टर्स एक्शन कमेटी (एम-टीएसी) के नेतृत्व में 5 मार्च की मध्यरात्रि से शुरू हुई है। ट्रांसपोर्ट संगठनों का आरोप है कि ई-चालान सिस्टम का कई जगहों पर गलत इस्तेमाल हो रहा है और कई बार नियमों का पालन करने के बावजूद भी वाहनों पर चालान काट दिए जाते हैं।

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि नए नियमों के तहत किसी चालान को चुनौती देने के लिए पहले 50 प्रतिशत जुर्माना जमा करना पड़ता है। संगठनों का दावा है कि यह व्यवस्था अनुचित है और इससे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ट्रांसपोर्ट संगठनों ने अपनी कई प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखी हैं। इनमें अनुचित और पुराने ई-चालानों को तुरंत रद्द करना, टोल और टैक्स में कमी करना, चेक-पोस्ट पर अधिकारियों द्वारा होने वाली कथित परेशानियों को बंद करना और परिवहन से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था बनाने की मांग शामिल है।

सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच इस मुद्दे को लेकर बातचीत भी हुई, लेकिन फिलहाल कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। बातचीत विफल होने के बाद ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल को अनिश्चितकालीन घोषित कर दिया है।

इस हड़ताल का असर राज्य में माल ढुलाई, बाजारों में सामान की आपूर्ति, स्कूल बसों और निजी बस सेवाओं पर भी पड़ सकता है। कई शहरों में यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

इस बीच मुंबई के आजाद मैदान में ट्रांसपोर्टरों द्वारा बड़े प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है, जहां बड़ी संख्या में वाहन और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोग जुट सकते हैं।

राज्य के परिवहन मंत्री ने कहा है कि अनुचित ई-चालानों की समीक्षा की जाएगी और ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। हालांकि फिलहाल ट्रांसपोर्ट संगठन हड़ताल वापस लेने के संकेत नहीं दे रहे हैं।

स्थिति को देखते हुए सरकार और ट्रांसपोर्ट संगठनों के बीच आगे होने वाली बातचीत पर सभी की नजर टिकी हुई है।