मुंबई, 10 अप्रैल 2026 – Bombay High Court ने 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की चांदिवली सीट से जुड़ी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जांच को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने EVM मशीनों की सीमित “डायग्नोस्टिक जांच” की अनुमति दी है, जिससे चुनावी प्रक्रिया और पारदर्शिता पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।

यह याचिका कांग्रेस उम्मीदवार Mohammad Arif Lalani Khan (नसीम खान) द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए EVM में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। वे इस सीट पर Dilip Bhausaheb Lande से करीब 20,625 वोटों के अंतर से हार गए थे।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Somasekhar Sundaresan ने 16 और 17 अप्रैल 2026 को EVM मशीनों की जांच कराने का निर्देश दिया है। यह जांच Bharat Electronics Limited (BEL) द्वारा की जाएगी, जो इन मशीनों की निर्माता कंपनी भी है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जांच केवल तकनीकी स्थिति (डायग्नोस्टिक चेक) तक सीमित रहेगी और इसमें पूर्ण फोरेंसिक ऑडिट शामिल नहीं होगा।

गौरतलब है कि मार्च 2026 में कोर्ट ने मुख्य चुनाव याचिका को पर्याप्त साक्ष्यों के अभाव में खारिज कर दिया था, लेकिन इससे पहले फरवरी में EVM जांच की सीमित अनुमति दी गई थी। अब चुनाव आयोग ने सभी संबंधित उम्मीदवारों को इस प्रक्रिया की जानकारी दे दी है।

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब जांच वही कंपनी करेगी जिसने मशीन बनाई है, तो निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों और लाइव मॉनिटरिंग की आवश्यकता है।

यह मामला एक बार फिर EVM की विश्वसनीयता और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, चूंकि यह जांच सीमित दायरे में होगी, इसलिए इससे चुनाव परिणाम पर कोई सीधा प्रभाव पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की नजरें टिकी हैं।