महाराष्ट्र के कई जिलों में नकली बीजों के वितरण ने खरीफ सीजन की शुरुआत में ही किसानों को गहरे संकट में डाल दिया है। राज्य के विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों से ऐसी खबरें आ रही हैं जहां किसानों द्वारा बोई गई सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी प्रमुख फसलें अंकुरित ही नहीं हुईं। किसानों का कहना है कि उन्होंने अधिकृत दुकानों से महंगे बीज खरीदे थे, लेकिन बुवाई के बाद खेतों में फसल नहीं उगने से उनकी वर्षों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई है। इस अप्रत्याशित क्षति से किसानों में भारी रोष है।

प्रारंभिक जांच और किसानों की शिकायतों के आधार पर यह स्पष्ट हो रहा है कि बाजार में नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीज व्यापक पैमाने पर बेचे गए हैं। कृषि विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल मुआवजे की मांग की है और नकली बीज बेचने वाली कंपनियों तथा आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आह्वान किया है। कई स्थानों पर किसानों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं। सरकार ने मामले की गंभीरता स्वीकार करते हुए जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता की आवश्यकता है ताकि वे दोबारा बुवाई या जीवनयापन कर सकें।

इंडिया आपतक न्यूज़
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