महाराष्ट्र की राजनीति और सहकारिता क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार के सहकार, विपणन और वस्त्रोद्योग विभाग ने राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इसके अनुसार, केवल बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में मौजूद 10 साल की कार्यकाल सीमा के आधार पर सहकारी बैंकों के निदेशकों को चुनाव लड़ने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि इस प्रावधान को महाराष्ट्र के सहकारी कानून में शामिल नहीं किया गया है।
इस फैसले से जलगांव जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के कई दिग्गज निदेशकों को बड़ी राहत मिली है। इससे पहले 16 जनवरी 2026 को राज्य सहकारी चुनाव प्राधिकरण ने एक परिपत्र जारी कर 10 साल या उससे अधिक समय तक निदेशक रहे लोगों को अगले चुनाव में अयोग्य ठहराने के निर्देश दिए थे। ऐसे उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज किए जाने और उन्हें तीन साल के कूलिंग-ऑफ पीरियड के बाद ही दोबारा चुनाव लड़ने की व्यवस्था की बात कही गई थी।
अब सरकार के नए रुख के बाद जलगांव जिला बैंक के करीब नौ अनुभवी नेताओं के चुनावी भविष्य पर मंडरा रहा संकट फिलहाल टल गया है। इनमें बैंक के वर्तमान अध्यक्ष संजय पवार, विधायक एकनाथ खडसे, विधायक अनिल पाटील, विधायक अमोल पाटील, विधायक किशोर पाटील, एडवोकेट रोहिणी खडसे, पूर्व विधायक चिमणराव पाटील, पूर्व मंत्री गुलाबराव देवकर और एडवोकेट रवींद्र पाटील जैसे नाम शामिल हैं।
यदि 10 साल का नियम लागू रहता, तो आगामी जिला बैंक चुनाव में कई पुराने और प्रभावशाली चेहरों को बाहर होना पड़ सकता था और नए नेताओं के लिए रास्ता खुलता। लेकिन महाराष्ट्र सरकार के इस नए निर्देश के बाद जलगांव जिला बैंक की मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के बड़े पैमाने पर बने रहने की संभावना बढ़ गई है।
