जलगांव/नागपुर, 8 सितंबर। जैन इरिगेशन को उधारी के भुगतान के लिए दिया गया करीब 19 लाख 88 हजार 885 रुपये का चेक बाउंस होने के मामले में नागपुर की रोशन एग्रो सेंटर की संचालिका जयश्री पुरुषोत्तम बावीस्कर को न्यायालय ने दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को दो महीने के कारावास की सजा सुनाने के साथ ही जैन इरिगेशन को 23 लाख रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया है। 2014 के उधारी लेनदेन से जुड़ा था मामला प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयश्री बावीस्कर ने वर्ष 2014 में जैन इरिगेशन सिस्टम्स लिमिटेड से किए गए उधारी के लेनदेन के भुगतान के लिए 19,88,885 रुपये का चेक जारी किया था। कंपनी ने जब यह चेक बैंक में जमा किया, तो वह अनादरित होकर वापस आ गया। इसके बाद जैन इरिगेशन की ओर से संबंधित मामले में न्यायालय का रुख किया गया और फौजदारी प्रकरण क्रमांक 4865/2014 दर्ज कराया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 2 सितंबर 2026 को न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया। कंपनी की ओर से अदालत के समक्ष बताया गया कि संबंधित चेक उधारी के वास्तविक लेनदेन के भुगतान के लिए दिया गया था। दोनों पक्षों की दलीलों और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने जयश्री बावीस्कर को दोषी ठहराते हुए दो महीने के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही चेक की मूल राशि से अधिक 23 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति जैन इरिगेशन को देने का आदेश भी दिया गया। इस मामले में जैन इरिगेशन की ओर से अधिवक्ता निशांत अत्रे ने पैरवी की, जबकि आरोपी की ओर से अधिवक्ता सतीश सी. पाटील ने पक्ष रखा। चेक बाउंस मामलों में कानूनी जिम्मेदारी का संदेश न्यायालय के इस फैसले को उधारी के वित्तीय लेनदेन में चेक के माध्यम से भुगतान करने वालों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चेक जारी करने के बाद उसके अनादरित होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला एक बार फिर यह स्पष्ट करता है कि उधारी के भुगतान के लिए जारी किया गया चेक बाउंस होने पर आर्थिक दायित्व के साथ-साथ कानूनी परिणाम भी सामने आ सकते हैं।