जलगांव जिले में जमीन पर कर्ज लेने वाले नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। जिलाधिकारी तथा जिलादंडाधिकारी कार्यालय, जलगांव ने जिले की सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को एक महत्वपूर्ण परिपत्रक जारी किया है। इसके तहत पात्र मामलों में कर्ज मंजूर करते समय जमीन के लिए अलग से अकृषक यानी NA परमिशन, NA NOC या अकृषक सनद की मांग नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं।
महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता में किए गए संशोधनों के अनुसार, यदि किसी जमीन के लिए महाराष्ट्र प्रादेशिक नियोजन एवं नगररचना अधिनियम, 1966 के तहत संबंधित नियोजन प्राधिकरण ने विकास अनुमति, निर्माण अनुमति या लेआउट प्लान को मंजूरी दे दी है, तो ऐसी जमीन के लिए जिलाधिकारी से अलग से अकृषक यानी NA परमिशन लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
जिलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, अभी भी कुछ बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की ओर से कर्ज मंजूरी के दौरान जमीन मालिकों से अलग NA परमिशन, NOC या अकृषक सनद मांगी जा रही थी। इसके कारण नागरिकों के कर्ज प्रकरणों में अनावश्यक देरी हो रही थी।
अब जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि केवल स्वतंत्र NA परमिशन, NOC या अकृषक सनद उपलब्ध नहीं होने के कारण पात्र कर्ज प्रकरण को लंबित रखना या उसे खारिज करना उचित नहीं होगा।
वहीं, यदि किसी जमीन के लिए शासन की मौजूदा व्यवस्था के तहत One Time Conversion Premium भरना लागू है, तो संबंधित आवेदक द्वारा उसका चालान या अधिकृत प्रमाण प्रस्तुत किए जाने के बाद अलग से NA परमिशन, NOC या सनद के लिए आग्रह नहीं किया जाना चाहिए।
जिलाधिकारी कार्यालय ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को निर्देश दिया है कि इन संशोधित प्रावधानों की जानकारी अपनी सभी संबंधित शाखाओं तक तत्काल पहुंचाई जाए। साथ ही कर्ज प्रक्रिया, चेकलिस्ट और आंतरिक निर्देशों में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं।
इस फैसले से जमीन पर कर्ज लेने वाले नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खास तौर पर उन लोगों को फायदा होगा, जिनके कर्ज प्रकरण केवल अलग NA दस्तावेजों की मांग के कारण लंबित हो रहे थे।
बैंकों और वित्तीय संस्थाओं को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि शासन के संशोधित नियमों के दायरे में आने वाले पात्र मामलों में NA परमिशन, NOC या अकृषक सनद की अनावश्यक मांग न की जाए और कर्ज प्रकरणों पर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई की जाए।