जलगांव जिले के वाकोद स्थित जैन फार्म में 18 सितंबर को विश्व बांस दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बांस का पूजन कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया और बांस के पर्यावरणीय तथा औषधीय महत्व पर प्रकाश डाला गया।
जैन इरिगेशन के संस्थापक श्रद्धेय भवरलालजी जैन ने वर्ष 1989 में वाकोद जैन फार्म में 10×10 फीट की दूरी पर मानवेल प्रजाति के बांस का प्रायोगिक रूप से रोपण किया था। वे बांस को दृढ़निश्चय और कठिन परिस्थितियों में स्वाभिमान के साथ खड़े रहने का प्रतीक मानते थे।
कार्यक्रम में वाकोद फार्म के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद सिंह राजपूत ने बांस के विभिन्न उपयोगों और उसके पर्यावरणीय महत्व की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वाकोद में बांस की 24 घंटे में 9 से 12 इंच तक वृद्धि दर्ज की गई है। कार्यक्रम के दौरान गणपत शेळके, करुणाबाई शेळके और विनोद सिंह राजपूत के हाथों बांस पूजन किया गया।
इस अवसर पर संदीप बावस्कर, संतोष वानखेडे, विजय सपकाळे, चेतन धामोडे, सीमा जाधव, लताबाई जवखेडे, मीराबाई कुरंगे, रेणुकाबाई पाटील और रेखाबाई जाधव सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
जैन इरिगेशन की सामाजिक प्रतिबद्धता के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में हरित संस्कृति को प्रोत्साहित करना रहा।
नोट: समाचार में बांस के औषधीय लाभों से जुड़े कुछ दावे किए गए हैं। इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने से पहले स्वतंत्र चिकित्सकीय/वैज्ञानिक स्रोत से पुष्टि आवश्यक है।
