मंगलवार को जलगांव में कुछ समय के लिए बारिश हुई, लेकिन जल्द ही बारिश थम गई। लगातार रुक-रुक कर हो रही वर्षा से किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि जिले की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती, विशेषकर केला और खरीफ फसलों पर निर्भर है।

मौसम विभाग के हालिया पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई के अंत तक महाराष्ट्र के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना जताई गई है, जिसका असर जलगांव जैसे कृषि प्रधान जिलों पर भी पड़ सकता है।

जलगांव का मौसम स्वभाव से अपेक्षाकृत शुष्क माना जाता है। जिले में औसतन लगभग 740 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, जिसमें से अधिकांश वर्षा जून से सितंबर के बीच होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कम बारिश ही चिंता का कारण नहीं है। हरियाली में कमी, अनियोजित पेड़ों की कटाई, भूजल का लगातार बढ़ता दोहन, वर्षा जल का पर्याप्त संचयन न होना और तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण भी जल संकट को गंभीर बना रहे हैं। भूजल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, पेड़ स्थानीय वातावरण को ठंडा रखने, मिट्टी में नमी बनाए रखने और जल चक्र को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण और जल संरक्षण भविष्य की आवश्यकता बन चुका है।