जैन धर्म में मोक्षमार्ग और आत्मकल्याण की साधना का विशेष महत्व माना जाता है। इसी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जलगांव के युवा तुमित धर्मेंद्र गोसर ने गुजरात स्थित महातीर्थ शत्रुंजय पालीताणा की अत्यंत कठिन और पुण्यदायी नव्वाणू यात्रा पूर्ण कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।
ऑरेंज फोटोग्राफी के संचालक धर्मेंद्र (धर्मेश) गोसर के 24 वर्षीय पुत्र तुमित गोसर ने कठोर धार्मिक नियमों का पालन करते हुए लगातार 99 यात्राएं पूरी कीं। इसके बाद उन्होंने अपनी साधना को आगे बढ़ाते हुए कुल 108 पवित्र यात्राएं पूर्ण कर विशेष पुण्यसंचय प्राप्त किया। यात्रा के दौरान उन्होंने सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार भोजन करने का नियम निभाया। वहीं अंतिम दो दिनों में अन्न और जल का त्याग कर सात अतिरिक्त यात्राएं पूर्ण कीं।
यह पवित्र यात्रा 24 अप्रैल 2026 को परम पूज्य समवर प्रभजी महाराज साहेब के मार्गदर्शन तथा परम पूज्य विरती प्रभाजी महाराज साहेब और परम पूज्य उदय प्रभाजी महाराज साहेब के सान्निध्य में प्रारंभ हुई थी। केसरी समाज के सहयोग से संपन्न यह धार्मिक यात्रा 7 जून 2026 को सफलतापूर्वक पूर्ण हुई।
9 जून को जब तुमित गोसर तीर्थयात्रा पूर्ण कर जलगांव लौटे, तब रेलवे स्टेशन पर गोसर परिवार, मित्रों और विभिन्न समाजों के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखने को मिला।
जैन धर्म में शत्रुंजय पालीताणा तीर्थ को तीर्थाधिराज का दर्जा प्राप्त है। गुजरात के भावनगर जिले में स्थित यह तीर्थ भगवान आदिनाथ से जुड़ा हुआ माना जाता है और इसे शाश्वत तीर्थ के रूप में विशेष सम्मान प्राप्त है। मान्यता है कि इस पवित्र पर्वत पर असंख्य साधु-साध्वियों ने मोक्ष प्राप्त किया है, जिसके कारण इसकी प्रत्येक शिला और कण को अत्यंत पवित्र माना जाता है।
शत्रुंजय पर्वत पर लगभग एक हजार मंदिर स्थित हैं। मुख्य मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 3,750 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। जैन धर्म में यह यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, कर्मनिर्जरा और अंतर्मन के विकारों पर विजय प्राप्त करने का माध्यम मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ‘शत्रुंजय’ का अर्थ है अपने भीतर के शत्रुओं जैसे काम, क्रोध, लोभ और अहंकार पर विजय प्राप्त करना। यही कारण है कि इस यात्रा को आत्मिक उन्नति और मोक्षमार्ग की दिशा में एक महत्वपूर्ण साधना माना जाता है।
